✨ "अधूरी किताब" –
मेरी किताब के पहले पन्ने ख़ाली हुए हैं,
कोशिश है — ज़िंदगी को उनमें उतारूँगा।
कभी सपने अधूरे थे, कभी उम्मीद अधूरी,
हर रोज़ कुछ लिखता था, और हर रोज़ मिटाता था।
कभी हालात ने रोका, कभी लोगों ने टोका,
पर मैंने अपनी कोशिशें कभी छोड़ी नहीं,
और अपनी आस — कभी तोड़ी नहीं।
एक दिन यही किताब पूरी करूँगा,
उसमें तेरे एहसान का भी ज़िक्र करूँगा।
मेरा वक़्त शायद आज बंदिशों में है,
पर मैं हारा नहीं — बस ठहरा हूँ,
क्योंकि जीत हमेशा देर से आती है,
पर जब आती है... पूरी दुनिया को बदल देती है।
✍️ लेखक: राजू अंभोरे
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